. कोरोनावायरस से दुनिया मेें दहशत के माहौल के बीच परदेस की ये दो कहानियां इंसानियत के जज्बे की मिसाल पेश कर रही हैं। अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीयों ने भूखों को खाना खिलाने की पहल की है। अमेरिका में रहने वाले भारतीयों ने कुछ घंटों में ही 37 लाख रुपए इकट्ठा कर एक हफ्ते का राशन भारत के 6 राज्यों में भिजवा दिया, वहीं ऑस्ट्रेलिया में हिन्दुस्तानी सिख नौजवान लॉकडाउन के कारण नौकरी गंवाने के बादवजूद जरूरतमंदों को घर-घर खाना बांट रहे हैं।
ऑस्ट्रेलिया | बुजुर्ग, सिंगल मदर, सेल्फ क्वारेंटाइन और कोरोना संक्रमितों को उनके घर तक पहुंचा रहे हैं खाना
ऑस्ट्रेलिया में सिख नौजवान जरूरतमंदों को खाना दे रहे हैं। मेलबर्न में सिख वॉलंटियर ऑस्ट्रेलिया संगठन के वाइस प्रेसिडेंट मनप्रीत सिंह ने बताया कि 19 फरवरी 2017 में ‘फ्री फूड वैन’ शुरू किया। वैन इस तरह से डिजाइन की गई है, जिससे खाना गर्म रहे। कम्यूनिटी कैम्पस मेंं खाना बनता था और फूड वैन से शहर में रोजाना सवा सौ से ज्यादा लोगों को खाना पहुंचाते थे। संगठन के साथ 100 से ज्यादा लोग रजिस्टर्ड हैं। लॉकडाउन से 80% वॉलंटियर्स की नौकरी चली गई। लेकिन खाना पहुंचाने काम जारी है। अब बुजुर्ग, सिंगल मदर, सेल्फ क्वारेंटाइन और संक्रमितों के परिवार को घर तक खाना पहुंचाते हैं। 13 टीम बनाकर फूड वैन से मेलबर्न में 750 लोगों को रोजाना खाना पहुंचा रहे हैं।
अमेरिका | चंद घंटों में रकम जुटाई; राजस्थान, गुजरात समेत 6 राज्यों के गरीबों को हफ्तेभर का राशन दिया
अमेरिका में कुछ एनआरआई मिलकर एक एसोसिएशन फॉर इंडियाज डेवलेपमेंट (एड इंडिया) चलाते हैं। बोस्टन में संगठन के डेवलपमेंट काेऑर्डिनेटर साेमनाथ मुखर्जी ने बताया कि भारत में लॉकडाउन की घोषणा के तुरंत बाद हमने सभी सदस्याें को सोशल मीडिया से संदेश भेजा। कुछ ही घंटे में करीब 50 हजार डॉलर (37 लाख रु.) इकट्ठे हो गए। इससे भारत में तेलंगाना, राजस्थान, झारखंड, गुजरात, बंगाल, तमिलनाडु में करीब एक दर्जन सामाजिक संगठनों के जरिए ढाई हजार परिवार के लिए खाने का सामान भिजवा रहे हैं। इसे आदिवासियों और जरूरतमंदों को पहुंचा रहे हैं। इसके अलावा बोस्टन में टैक्सी और अन्य इमरजेंसी सेवा देने वालों को मदद कर रहे हैं।